तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी



आसमानों से जो आता है मुझे, वो दुआ तुम हो ये पता है मुझे,
इश्क हो तुम ये जानता हूँ मैं, तुम मेरी हो ये जनता हूँ मैं।
मेरा ईमान-ओ-दिन है तुमपर, मुझे पूरा यकीन है तुमपर,
फिर भी कमबख्त ये दिल धड़कता है, रोज ये सोचके तड़पत, तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी।

यूँ तो दिन से भी मेरी अनबन है-2 , रात लेकिन पुरानी दुश्मन है। शाम बे कली भी रहती है, दिन में एक खलबली भी रहती है।
बेखबर कितना भी हो जाऊं, नींद कितनी भी गहरी सो जाऊं, दर्द सीने में जमा रहता है, एक घटका स लगा रहता है, तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी।


तुम मोहब्बत का एक जजीरा हो-2,
जैसे मंदिर में कोई मीरा हो, जैसे दरगाह पर हो कुन फाया तुमने वैसे ही मुझको है गाया। प्यार करती हो जितना है बस में, दौड़ता हूँ तुम्हारी नस-नस में ,
जानता हूँ जो अपना नाता है, फिर भी जो ये डर सताये जाता है,  तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी।

तुमपे शक है अरे नहीं जाना, ऐसा हो सकता है कहीं जाना-2
सबसे आला किया , निराला किया, इश्क तुमने किताबों वाला किया, पर किताबें ही ये बताती हैं, कस्तियाँ दिल के टूट जाती है, इससे पहले भी ख्वाब टूटे हैं, इससे पहले भी साथ छूटे हैं, तुम मुझे छोड़ तो नही दोगी।

--------------//----------मनोज मुंतसिर 

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