गांवों का पुनर्निर्माण अध्याय-2 स्वराज्य में ग्राम सेवा

गांवों का पुनर्निर्माण
अध्याय-2

भाग-1
स्वराज्य में ग्राम सेवा


स्वयंसेवक एवं स्वयंसेविकाएं गाँव में जाकर लोगों को स्वराज्य धर्म की शिक्षा दें । वे गांवों को साफ और स्वावलंबी बनाने का धर्म लोगों को सिखाएं । स्वराज्य में सरकार गाँवों को साफ नहीं कराएगी, बल्कि लोग उन्हें आओने समझकर खुद ही साफ करेंगे । ग्रामोद्योग का नाश हो जाने से गाँव बारबाद हो गए है ;ग्रामोद्योग का पुनरुद्धार करने से ही उनका पुनरुद्धार होगा । इसमें चरखा मध्य बिन्दु है और उसके आसपास दूसरे धंधे प्रतिष्ठित हैं।
............... इस तरह हर आदमी परिश्रम का मूल्य समझे और अगर सब्लॉग परिश्रमी बन जाएं और जनता के कल्याण के लिए कार्य करें, तो जनता के लाखों रुपये बच जाए, उसके धन की वृद्धि हो और वह कम से कम कर देकर अधिक से अधिक सुखी हो ।

अहिंसक स्वराज्य में कोई किसी का शत्रु नहीं होगा, सब अपना- अपना काम करेंगे, कोई निरक्षर नही रहेगा,उतरोत्तर सबकी ज्ञान की वृद्धि होती जाएगी । सारी प्रजा में कम से कम बीमारियाँ होंगी, कोई दरिद्री नही होगा और परिश्रम करने वाले को बराबर काम मिलता रहेगा । स्वराज्य में जुवा,मद्दपान, व्यभिचार या वर्ग-विग्रह के लिए कोई गुंजाइश नही होगी । धनी लोग अपने धन का विवेकपूर्ण उपयोग करेंगे- भोग-विलाश और ऐस-आराम को बढ़ाने में उसे बर्बाद नही करेंगे। स्वराज्य में यह नही होना चाहिए की मुट्ठीभर धनी लोग रत्न-जटित प्रासादों में रहें और हजारों लाखों लोग हवा और प्रकाश से रहित कोठरियों में पशुओं का जीवन बीताएं । उसमें हिन्दू- मुस्लिम, स्पृश्य- अस्पृश्य तथा उंच-नीच के कोई भेदभाव नहीं होने चाहिए ।

संदर्भ:-हमारें गांवों का पुनर्निर्माण- गांधी जी

लेखक- धमेन्द्र भाई
युवा सामाजिक कार्यकर्ता
गाँव-सिवन, पोस्ट- धनेज, थाना- करगहर
जिला - रोहतास , सासाराम बिहार
मो- 8115073618,9471836040





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