हमारे गाँवों का पुनर्निर्माण भाग-1 गांवों का स्थान

अध्याय -1
गांवों का स्थान
गांवों की सेवा करने से ही सच्चे स्वराज्य की स्थापना होगी अन्य सब प्रयत्न निरर्थक सिद्ध होंगे।
अगर गांव नष्ट हो जाए, तो हिंदुस्तान भी नष्ट हो जाएगा । वह हिंदुस्तान ही नहीं रह जाएगा । दुनिया में उसका 'मिशन' ही खत्म हो जाएगा।
सच तो यह है कि हमें गांव वाला भारत और शहरों वाला भारत, इन दोनों में से एक को चुन लेना है । देहात उतने ही पुराने हैं, जितना कि यह भारत पुराना है। शहरों को विदेशी आधिपत्य ने बनाया है। जब यह आधिपत्य मिट जाएगा, तब शहरों को देहात के मातहत होकर रहना पड़ेगा । आज तो शहरों का बोलबाला है और वह गांव की सारी दौलत खींच लेते हैं । इससे गांव का ह्वास एवं नाश हो रहा है । गांवों का शोषण खुद एक संगठित हिंसा है । अगर हमें स्वराज्य की रचना अहिंसा के पाये पर करनी है, तो गांव को उनका उचित स्थान देना होगा।

संदर्भ:-हमारें गांवों का पुनर्निर्माण- गांधी जी |


Comments

Popular posts from this blog

प्यासे पंछियों और जानवरों की आवाज

जब कोई दाहिने गाल पर तमाचा मारे, तो बायां गाल सामने कर दें

हमारे गांवों का पुनर्निर्माण, अध्याय-2, भाग-2 - ग्राम-स्वराज्य