यादें


                    गजल

हाँ थोड़ा थक सा जाता हूँ
तो दूर निकलना छोड़ दिया,
पर ऐसा भी नहीं है कि
मैंने चलना छोड़ दिया।

फांसलें अक्सर रिश्तों में
अजीब सी दूरियाँ बढ़ा देते हैं 
पर ऐसा नहीं है कि मैंने
अपनों से मिलना छोड़ दिया।

हाँ जरा अकेला महशुस करता हूँ
खुद को ही अपनों के भीड़ में,
पर ऐसा भी नहीं है कि मैंने
अपनापन ही छोड़ दिया।

याद तो करता हूँ अब भी
मैं सभी को और परवाह भी,
पर कितना करता हूँ 
बस ये बताना छोड़ दिया।।

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