आनन्दित जीवन जीने का उपाय

आनन्दित जीवन जीने का उपाय : -

एक दिन एक उदास पति-पत्नी संत फरीद के पास पहुंचे। उन्होंने विनय के स्वर में कहा, "बाबा, दुनिया के कोने- कोने से लोग आपके पास आते हैं, वे आपसे खुशियां लेकर लौटते हैं आप किसी को भी निराश नहीं करते मेरे जीवन में भी बहुत दुख हैं । मुझे उनसे मुक्त कीजिए ।"

फरीद ने देखा, सोचा और झटके से झोपड़े के सामने वाले खंभे के पास जा पहुंचे । फिर खंभे को दोनों हाथों से पकड़कर ''बचाओ-बचाओ''  चिल्लाने लगे । शोर सुनकर सारा गांव इकट्ठा हो गया । लोगों ने पूछा कि क्या हुआ तो बाबा ने कहा- ''इस खंभे ने मुझे पकड़ लिया है, छोड़ नहीं रहा है।'' लोग हैरानी से देखने लगे ।

एक बुजुर्ग ने हिम्मत कर कहा-
"बाबा, सारी‌दुनिया आपसे समझ लेने आती है और आप हैं कि खुद ऐसी नासमझी कर रहे हैं । खंभे ने कहां, आपने खंभे को पकड़ रखा है ।"

फरीद खंभे को छोड़ते हुए बोले,

"यही बात तो तुम सब को समझाना चाहता हूं कि दुख ने तुम्हें नहीं, तुमने ही दुखों को पकड़ रखा है । तुम छोड़ दो तो ये अपने आप छूट जाएंगे।”

उनकी इस बात पर गंभीरता से सोचें तो इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि हमारे दुख-तकलीफ इसलिए हैं क्योंकि हमने वैसी सोच बना रखी है । ऐसा न हुआ तो क्या होगा और वैसा न हुआ तो क्या हो सकता है । सब दुख हमारी नासमझी और गलत सोच के कारण मौजूद हैं ।इसलिए सिर्फ अपनी सोच बदल दीजिए, सारे दुख उसी वक्त खत्म हो जाएंगे। ऐसा नहीं है कि जितने संबुद्ध हुए‌ हैं, उनके जीवन में सब कुछ अच्छा-अच्छा हुआ हो, लेकिन वे 24 घंटे मस्ती में रहते थे ।
एक बात‌ अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए कि सुख और दुख सिर्फ आदतें हैं । दुखी रहने की आदत तो हमने डाल रखी है । सुखी रहने की आदत भी डाल सकते हैं।

एक प्रयोग कीजिए और तुरंत उसका परिणाम भी देख लीजिए। सुबह सोकर उठते ही खुद को आनंद के भाव से भर लीजिए । इसे स्वभाव बनाइए और आदत में शामिल कर लीजिए।

यह गलत सोच है कि इतना धन,पद या प्रतिष्ठा मिल जाए तो आनंदित हो जाएंगे । दरअसल, यह एक शर्त है । जिसने भी अपने आनंद पर शर्त लगाई वह आज तक आनंदित नहीं हो सका । अगर आपने बेशर्त आनंदित जीवन जीने का अभ्यास शुरू कर दिया तो ब्रहमांड की सारी शक्तियां आपकी ओर आकर्षित होने लगेंगी
                       -एस. एन. मिश्रा

---    धमेन्द्र भाई

Comments

Popular posts from this blog

प्यासे पंछियों और जानवरों की आवाज

जब कोई दाहिने गाल पर तमाचा मारे, तो बायां गाल सामने कर दें

हमारे गांवों का पुनर्निर्माण, अध्याय-2, भाग-2 - ग्राम-स्वराज्य