जीवन नीति
जीवन नीति
पाणी आपने पाय , भलूं भोजन तो दीजे.,
आवी नमावे शीश , दंडवत कोडे कीजे.
आपण घा से दाम, काम महोरोनूं करीए,
आप उगारे प्राण , ते तणा दुःखमां मरीए.
गुण केडे तो गुण दश गणों, मन ,वाचा,कर्मे करी. ,
अवगुण केडे जो गुण करे, ते जगमां जीत्यो सही.
अर्थ---- जो हमे पानी पिलाये, उसे हम अच्छा भोजन करायें। जो आकर हमारे सामने सिर नवाये, उसे हम उमंग से दंडवत प्रणाम करें। जो हमारे लिए एक पैसा खर्च करे, उसका नम् मुहरों की कीमत का काम कर दें। जो हमारे प्राण बचावे, उसका दुख दूर करने के लिए हम अपने प्राण तक न्योछावर कर दें। जो हमारा उपकार करे, उसका तो हमें मन,बचन और कर्म से दस गुना उपकार करना ही चाहिए। लेकिन जग में सच्चा और सार्थक जिना उसी का है , जो अपकार करने वाले के प्रति भी उपकार करता है।
D K UPADHYAY
MSW - MGAHV WARDHA
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संदर्भ- आत्मकथा, महात्मा गांधी।
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