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आधुनिक परिवार और बिगड़ता कल

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" मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है " समाज के बिना व्यक्ति का जीवन बिताना सम्भव नही है। समाज का जन्म परिवार से होता है, परिवार का जन्म व्यक्तियों के समूह से होता है। एक गांव में समाज ...

गजल

इक औरत, इक मर्द _______________________ इक रोते मर्द की आँखें समंदर सी होती है, इक औरत की आँखों का आँसू मोती होता है। और मोती शायद समंदर के आगोश में ही होता है। ● इक हारता मर्द राजा होता है, और हारते...

बोझ नही मैं "बेटी"

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शाम हो गयी अभी बाहर घुमाओ न पापा थक गई चलते- चलते कंधे पर बिठाओ न पापा। लगाती है किलकारियाँ आंगन में तेरे उन किलकारियों को सजाओ न पापा। मम्मी तो सो गई छोड़कर आपहिं थपकी देकर सुलाओ न पापा। अभी तो थी खिलती कमल इस कमल को खिलाओ न पापा। स्कूल तो पूरी हो गयी अब कॉलेज भी पहुंचाओ न पापा। पाल पोस कर बड़ा किया अब जुदा मत कराओ न पापा। अब डोली में बैठा दिया तो आंसू मत बहाओ न पापा। आपकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी है एकबार प्यार से मुस्कुराओ न पापा। मारते हैं क्यों सभी मेरे आने से पहले हमको इन पापियों से बचाओ न पापा। मैं तू हूँ लक्ष्मी घर की तेरे घर में लक्ष्मी को अपने लाओ न पापा। जलाते हैं दहेज के आग में इन दहेज दानवों को भगाओ न पापा। खिलाऊंगी फूल सदा आंगन की बगिया में तेरे अपनी आंगन की बगिया में सजाओ न पापा। करती हूं रचना, सम्पूर्ण सृष्टि का , इस सृष्टि का श्रृंगार कराओ न पापा। कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी इन सभी जन्मोंक रिश्तों में पाओ न पापा। करते हो बेटा बेटी का क्यों भेदभाव हमसे कम नही मैं उनसे करके बराबरी तुम दिखाओ न पापा। नही रहूंगी पीछा कभी उन बेटों से हमको भी बेटा ब...

पेसा अधिनियम( PESA Act)

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पंचायती राज मंत्रालय का अधिदेश पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर) का अधिदेश संविधान, के नौवें भाग, भाग IX क के अनुच्छेद 243 यघ के अनुसार जिला योजना समिति के संबंध में प्रावधान और पा...