Posts

Showing posts from January, 2020

मन को जीतना ही सबसे बड़ा तप है

Image
मन को जीतना ही सबसे बड़ा तप है एक यति-मुनि एक समय घूमते-घूमते नदी के तट पर चल रहे थे। उन्होंने एक नाव देखी तो इन्हें  इच्छा हुई कि हम भी आज नाव पर बैठकर नदी की सैर करें और प्रभु की प्रकृति के दृश्यों को देखें। नाव को देखने के विचार से उसमें चढ़ गए। मुनिवर नीचे के खाने में गये, जहां नाविक का सामान और निवास होता है । जाते ही उनकी दृष्टि एक कुमारी कन्या पर पड़ी, जो नाविक की पुत्री थी। कुमारी इतनी रुपवती थी कि मुनिवर को मूर्च्छा सी आ गई।देवी ने उनके मुख में पानी डाला तो होश आया। कुमारी ने पूछा ―"मुनिवर ! क्या हो गया ?" मुनि बोला― "देवी ! मैं तुम्हारे सौन्दर्य पर इतना मोहित हो गया कि मैं अपनी सुध-बुध भूल गया अब मेरा मन तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मेरी जीवन मृत्यु तुम्हारे आधीन है।"  कुमारी बोली ― "आपका कथन सत्य है, परन्तु मैं तो नीच जाति की मछानी हूं।" मुनि― "मुझ में यह सामर्थ्य है कि मेरे स्पर्श से तुम शुद्ध हो जाओगी।" कुमारी ― "पर अब तो दिन है।" मुनि― "मैं अभी रात कर दिखा सकता हूं।" कुमारी ― "फिर भी यह जल (नदी) है।...

शयन के नियम

                  शयन के नियम   1. सूने तथा निर्जन घर में अकेला नहीं सोना चाहिए। देव मन्दिर और श्मशान में भी नहीं सोना चाहिए। *(मनुस्मृति)*  2. किसी सोए हुए मनुष्य को अचानक नहीं जगाना चाहिए। *(विष्णुस्मृति)*  3. विद्यार्थी, नौकर औऱ द्वारपाल , यदि ये अधिक समय से सोए हुए हों, तो इन्हें जगा देना चाहिए। *(चाणक्यनीति)*  4. स्वस्थ मनुष्य को आयुरक्षा हेतु ब्रह्ममुहुर्त में उठना चाहिए। *(देवीभागवत)*  बिल्कुल अँधेरे कमरे में नहीं सोना चाहिए। *(पद्मपुराण)*  5. भीगे पैर नहीं सोना चाहिए। सूखे पैर सोने से लक्ष्मी (धन) की प्राप्ति होती है। (अत्रिस्मृति) टूटी खाट पर तथा जूठे मुँह सोना वर्जित है। *(महाभारत)*  6. नग्न होकर/निर्वस्त्र नहीं सोना चाहिए।  *(गौतम धर्म सूत्र)*  7. पूर्व की ओर सिर करके सोने से विद्या, पश्चिम की ओर सिर करके सोने से प्रबल चिन्ता, उत्तर की ओर सिर करके सोने से हानि व मृत्यु तथा दक्षिण की ओर सिर करके सोने से धन व आयु की प्राप्ति होती है।   *(आचारमय़ूख)*  8. दिन में कभी नहीं सोना ...

यादें

                    गजल हाँ थोड़ा थक सा जाता हूँ तो दूर निकलना छोड़ दिया, पर ऐसा भी नहीं है कि मैंने चलना छोड़ दिया। फांसलें अक्सर रिश्तों में अजीब सी दूरियाँ बढ़ा देते हैं  पर ऐसा नहीं है कि मैंने अपनों से मिलना छोड़ दिया। हाँ जरा अकेला महशुस करता हूँ खुद को ही अपनों के भीड़ में, पर ऐसा भी नहीं है कि मैंने अपनापन ही छोड़ दिया। याद तो करता हूँ अब भी मैं सभी को और परवाह भी, पर कितना करता हूँ  बस ये बताना छोड़ दिया।।

जीवन मंत्र

विवेकानंद जयंती  जीवन मंत्र ;- “खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है। सबसे बड़ा धर्म है अपने स्वभाव के प्रति सच्चे होना। खुद पर विश्वास करो।”- स्वामी विवेकानंद  रामकृष्ण परमहंस के शिष्य स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन है। उनके जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र बताए गए हैं। अगर इन सूत्रों को अपने जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। 1.आत्मविश्वास और अपने कर्म पर भरोसा रखने से ही सफलता मिल सकती है। स्वामी विवेकानंद जी विदेश में थे। वहां उनकी पहचान एक धनी महिला से हो गई। वह स्वामीजी से बहुत प्रभावित हुई और उनकी शिष्या बन गई। एक दिन वे दोनों घोड़ा गाड़ी से घूम रहे थे। रास्ते में गाड़ी वाले ने सड़क किनारे गाड़ी रोकी, वहां एक महिला और कुछ बच्चे बैठे हुए थे। गाड़ी वाला उनके पास गया, बच्चों को प्यार किया और महिला को कुछ रुपए देकर लौट आया। स्वामीजी के साथ बैठी धनी महिला ये सब ध्यान देख रही थी। जब गाड़ी वाले ने फिर से गाड़ी चलाना शुरू की तो महिला ने उससे पूछा कि आप किससे मिलने गए थे, वो महिला और बच्चे कौन हैं? गाड़ी वाले ने कहा कि वह मेरी पत्नी...

स्वर्ग का द्वार

Image
                            "स्वर्ग का द्वार" सुबह का समय था। स्वर्ग के द्वार पर चार आदमी खड़े थे। स्वर्ग का द्वार बन्द था। चारों इस इन्तजार में थे कि स्वर्ग का द्वार खुले और वे स्वर्ग के भीतर प्रवेश कर सकें।           थोड़ी देर बाद द्वार का प्रहरी आया। उसने स्वर्ग का द्वार खोल दिया। द्वार खुलते ही सभी ने द्वार के भीतर जाना चाहा, लेकिन प्रहरी ने किसी को भीतर नहीं जाने दिया।           प्रहरी ने उन आदमियों से प्रश्र किया, "तुम लोग यहां क्यों खड़े हो ?" उन चारों आदमियों में से तीन ने उत्तर दिया, "हमने बहुत दान, पुण्य किए हैं। हम स्वर्ग में रहने के लिए आए हैं।" चौथा आदमी मौन खड़ा था। प्रहरी ने उससे भी प्रश्न किया, "तुम यहां क्यों खड़े हो ?" उस आदमी ने कहा,  "मैं सिर्फ स्वर्ग को झांक कर एक बार देखना चाहता था। मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि मैं स्वर्ग में रहने के काबिल नहीं हूँ क्योंकि मैंने कोई दान, पुण्य नहीं किया।"           प्रहरी ने चारों आदमिय...

आत्मज्ञान जीवन का वरदान

Image
                            आत्मज्ञान बड़ा शरीर होने से आदमी बड़ा नहीं होता, शरीर छोटा होने से छोटा नहीं होता। बड़े से बड़ा जो सृष्टि का मूल तत्व है उसमे बुद्धि लगाने से व्यास विशाल बुद्धि होती है,  "नमस्ते व्यासविशाल बुद्धेः उदारविंदा।  यत्पत्र येनत्वया भारत ततजालिको ज्ञानमय।।" बुद्धि में ज्ञान का दिया जलाने से विशाल बुद्धि होती है। तुच्छ चीजों को पाकर जो सुखी होते हैं वो तो बालक-बुद्धि है, बच्चों के आगे खिलौने, चाकलेट, लोलीपाप रखो और सच्चे हीरे रखो तो बच्चे खिलौनों में राजी हो जायेंगे और हीरे छोड़ देंगे। ऐसे ही संसार है, जो छोड़ के मरना है उसके पीछे मरे जा रहे हैं और जिसको पाकर मौत भी शरणागत हो जाती है, ऐसे आत्मदेव को छोड़ देते हैं।  श्रुति भगवती कहती है :~ “आत्मलाभात परमलाभम न विद्यते, आतमसुखातपरमसुखम।  न विद्यते, आतमज्ञानात परमज्ञानम न विद्यते।।”  आत्म-ज्ञान से बड़ा कोई लाभ नहीं, आत्म-सुख से बड़ा कोई सुख नहीं, आत्म-ज्ञान से बड़ा कोई ज्ञान नहीं। सदा के लिए ये दीनता, हीनता मिटाने...