सफलता की कुँजी
सफल बनना है तो आलस्य को त्यागें। आलस्य से जीवन के रचनात्मक पल नष्ट हो जाते हैं। आलसी मत बनें आलसी की तुलना उस तालाब से की जा सकती है, जिसके पानी में,सीमा में बंध जाने की वजह से , सरांध व काई जम जाती है। जबकि अनवरत चलने वाली नदी का पानी सदैव निर्मल रहता है। यदि आप दिनभर घर में पड़े रहते हैं तो आपके हाथ पैर जकड जाएँगे। आपको चलने फिरने में दिक्कत होगी। मनुष्य तो मनुष्य मशीन से यदि काम न लिया जाए तो उसके कलपुर्जे काम करना बंद कर देते हैं। बहुत पुरानी बात है। किसी देश में एक बूढ़ा व्यक्ति रहता था। वह काफी मेहनती था। खेतों में काम करके अपना गुजारा करता था। उसके तीन लड़के थे जो बड़े ही आलसी थे। उसकी आलस्य की वजह से बूढा और उसकी पत्नी काफी परेशान रहते थे। दोनों अपने लड़कों को समझाने की कोशिश करते लेकिन तीनों अपने आलसीपन से बाज नहीं आए। एक दिन बूढा किसान चल बसा। बुढ़िया ने अपने बेटों को खेत पर जाने के लिए कहा, लेकिन वे गए नहीं। जब तक अनाज था बुढ़िया ने उनको बना –बना कर खिलाया ,आखिर में एक दिन घर का सारा अनाज ख़त्म हो गया। जब घर में एक भी दाना नहीं बचा तो बुढिया ने अपनों बेटों से काम धंधे ...