सहजन के अनोखे गुण
सहजन में NUTRITION
इस पौधे के पत्ते छाल और फली में बहुत minerals और vitamins होते हैं. और इसका 1 छोटा cup 157% RDA vitamin C देता है.
सहजन के एक कप में :
- Vitamin B6- 19% daily needs
- Vitamin A-9%
- protein-2 g
- vitamin C-12%
- vitamin B2 riboflavin- 11%
- iron- 11%
- magnesium- 8%
जहाँ पर ये पौधा ना मिले वहां इसके पत्ते और फूलों को सुखाकर इसका चूर्ण काम में ले लेना चाहिए. आइये अभी जानते हैं इसके बेहतरीन फायदे जो इसको Tree of Heaven बनाते हैं.
- हड्डियों की मजबूती – जैसा के हम अपनी पुरानी पोस्ट में बता चुके हैं के अगर किसी को घुटने बदलने के लिए डॉक्टर ने बोल दिया है तो भी वो इसका प्रयोग कर के देखे, इसमें कैल्शियम और आयरन अधिक मात्रा में पाया जाता है जिसके सेवन से हड्डियाँ मज़बूत होती हैं, और हड्डियों की घिसावट रूकती है.
- कैंसर नहीं होगा – इस पौधे में बहुत सारे Anti Oxidants हैं और ये Free Radicals से लड़ने में बहुत सहायक है, ये कैंसर के सेल्स को बढ़ने से रोकता है, इसमें vitamin सी और Beta Carotene होते हैं इसके साथ में इसमें chlorogenic acid and quercetin भी हैं जो के सेल्स के लिए रक्षात्मक शील्ड का निर्माण करते हैं.
- तुरंत सर दर्द से आराम – सहजन की जड का रस निकाल कर इसको गुड के साथ सेवन करने से तुरंत सर दर्द में आराम आता है.
- आँखों के लिए – इसका नियमित सेवन आपकी आँखों की रौशनी को बढ़ाएगा, आप इसके पत्तों का रस निकाल कर इसको आँखों में भी लगा सकते हैं.
- आयुर्वेद में ३०० रोगों का सहजन से उपचार बताया गया है। इसकी फली, हरी पत्तियों व सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन-ए, सी और बी कॉम्पलैक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
- इसके फूल उदर रोगों व कफ रोगों में, इसकी फली वात व उदरशूल में, पत्ती नेत्ररोग, मोच, शियाटिका,गठिया आदि में उपयोगी है|
- जड़ दमा, जलोधर, पथरी,प्लीहा रोग आदि के लिए उपयोगी है तथा छाल का उपयोग शियाटिका ,गठिया, यकृत आदि रोगों के लिए श्रेयष्कर है|
- सहजन के विभिन्न अंगों के रस को मधुर,वातघ्न,रुचिकारक, वेदनाशक,पाचक आदि गुणों के रूप में जाना जाता है|
- सहजन के छाल में शहद मिलाकर पीने से वात, व कफ रोग शांत हो जाते है| इसकी पत्ती का काढ़ा बनाकर पीने से गठिया,शियाटिका ,पक्षाघात,वायु विकार में शीघ्र लाभ पहुंचता है| शियाटिका के तीव्र वेग में इसकी जड़ का काढ़ा तीव्र गति से चमत्कारी प्रभाव दिखता है,
- मोच इत्यादि आने पर सहजन की पत्ती की लुगदी बनाकर सरसों तेल डालकर आंच पर पकाएं तथा मोच के स्थान पर लगाने से शीघ्र ही लाभ मिलने लगता है |
- सहजन को अस्सी प्रकार के दर्द व बहत्तर प्रकार के वायु विकारों का शमन करने वाला बताया गया है|
- इसकी सब्जी खाने से पुराने गठिया , जोड़ों के दर्द, वायु संचय , वात रोगों में लाभ होता है.
- सहजन के ताज़े पत्तों का रस कान में डालने से दर्द ठीक हो जाता है.
- सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी कटकर निकल जाती है.
- इसकी जड़ की छाल का काढा सेंधा नमक और हिंग डालकर पिने से पित्ताशय की पथरी में लाभ होता है.
- इसके पत्तों का रस बच्चों के पेट के किडें निकालता है और उलटी दस्त भी रोकता है.
- इसका रस सुबह शाम पीने से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है.
- इसकी पत्तियों के रस के सेवन से मोटापा धीरे धीरे कम होने लगता है.
- इसकी छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर दांतों के कीड़ें नष्ट होते है और दर्द में आराम मिलता है.
- इसके कोमल पत्तों का साग खाने से कब्ज दूर होती है.
- इसकी जड़ का काढे को सेंधा नमक और हिंग के साथ पिने से मिर्गी के दौरों में लाभ होता है.
- इसकी पत्तियों को पीसकर लगाने से घाव और सुजन ठीक होते है.
- सर दर्द में इसके पत्तों को पीसकर गर्म कर सिर में लेप लगाए या इसके बीज घीसकर सूंघे.
- इसमें दूध की तुलना में ४ गुना कैलशियम और दुगना प्रोटीन पाया जाता है।
- सहजन के बीज से पानी को काफी हद तक शुद्ध करके पेयजल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बीज को चूर्ण के रूप में पीस कर पानी में मिलाया जाता है। पानी में घुल कर यह एक प्रभावी नेचुरल क्लैरीफिकेशन एजेंट बन जाता है। यह न सिर्फ पानी को बैक्टीरिया रहित बनाता है बल्कि यह पानी की सांद्रता को भी बढ़ाता है जिससे जीवविज्ञान के नजरिए से मानवीय उपभोग के लिए अधिक योग्य बन जाता है।
- कैन्सर व पेट आदि शरीर के आभ्यान्तर में उत्पन्न गांठ, फोड़ा आदि में सहजन की जड़ का अजवाइन, हींग और सौंठ के साथ काढ़ा बनाकर पीने का प्रचलन है। यह भी पाया गया है कि यह काढ़ा साइटिका (पैरों में दर्द), जोड़ो में दर्द, लकवा, दमा, सूजन, पथरी आदि में लाभकारी है।
- सहजन के गोंद को जोड़ों के दर्द और शहद को दमा आदि रोगों में लाभदायक माना जाता है।
- आज भी ग्रामीणों की ऐसी मान्यता है कि सहजन के प्रयोग से विषाणु जनित रोग चेचक के होने का खतरा टल जाता है।
- सहजन में हाई मात्रा में ओलिक एसिड होता है जो कि एक प्रकार का मोनोसैच्युरेटेड फैट है और यह शरीर के लिये अति आवश्यक है।
- सहजन में विटामिन सी की मात्रा बहुत होती है। विटामिन सी शीर के कई रोगों से लड़ता है, खासतौर पर सर्दी जुखाम से। अगर सर्दी की वजह से नाक कान बंद हो चुके हैं तो, आप सहजन को पानी में उबाल कर उस पानी का भाप लें। इससे जकड़न कम होगी।
- इसमें कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है जिससे हड्डियां मजबूत बनती है। इसके अलावा इसमें आइरन, मैग्नीशियम और सीलियम होता है।
- इसका जूस गर्भवती को देने की सलाह दी जाती है। इससे डिलवरी में होने वाली समस्या से राहत मिलती है और डिलवरी के बाद भी मां को तकलीफ कम होती है।
- सहजन में विटामिन ए होता है जो कि पुराने समय से ही सौंदर्य के लिये प्रयोग किया आता जा रहा है। इस हरी सब्जी को अक्सर खाने से बुढापा दूर रहता है। इससे आंखों की रौशनी भी अच्छी होती है।
- आप सहजन को सूप के रूप में पी सकते हैं, इससे शरीर का रक्त साफ होता है। पिंपल जैसी समस्याएं तभी सही होंगी जब खून अंदर से साफ होगा।
- मौसमी बीमारियों में – सर्दी-खांसी, गले की खराश और छाती में बलगम जम जाने पर सहजन के सूप का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है. इसके लिए इसके पत्तों फूलों या फली का इस्तेमाल करें. सहजन का सूप पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने का काम करता है. इसकी फली में मौजूद फाइबर्स कब्ज की समस्या नहीं होने देते हैं.
- Blood Pressure – Heart Attack – cholesterol – सहजन का नियमित सेवन blood pressure को नियमित करता है, इसमें मौजूद vitamin सी, बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करते हैं और इसका नियमित सेवन हार्ट अटैक और हार्ट फ़ैल जैसी स्थिति आने ही नहीं देता.
- वैवाहिक जीवन के लिए – सहजन के सूप के नियमित सेवन से सेक्सुअल हेल्थ बेहतर होती है. सहजन महिला और पुरुष दोनों के लिए समान रूप से फायदेमंद है.
- अस्थमा में – अस्थमा की शिकायत होने पर भी सहजन का सूप पीना बहुत फायदेमंद होता है.
- खून की सफाई – सहजन का सूप खून की सफाई करने में भी मददगार है. खून साफ होने की वजह से चेहरे पर भी निखार आता है. चेहरे पर दाग धब्बे, कील मुंहासे सही होंगे.
- डायबिटीज – अगर आप डायबिटिक हैं तो ये आपके लिए बहुत काम का है, इसके पत्तों को छाया में सुखाकर 1 चम्मच दिन में दो बार भोजन के आधे घंटे के पहले सेवन करें. आपको इसमें आराम मिलेगा.
- किडनी के लिए – मोरिंगो में Vitamin A, C और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होता है, किडनी के रोगियों को डाइट की लिमिट होती है, ऐसे में उनको ज़रूरी पोषक तत्व की कमी हो जाती है, ऐसे में सहजन उनके लिए बहुत फायदेमंद डाइट है. और किडनी का जो Electrolyte को बैलेंस करने का काम है उसमे ये बहुत बेहतरी से काम करता है. अगर किडनी एक बार काम करना बंद कर दे तो रक्त में फॉस्फोरस बढ़ जाता है जिस से शरीर का कैल्शियम कम हो जाता है जिस से हड्डियों के बहुत सारे रोग हो सकते हैं, ऐसे में ऐसे रोगी जिनको किडनी की कोई समस्या है वो इसका सेवन ज़रूर करें.
- मोटापे के लिए – इसके 11 पत्तों की चाय बनाकर इसमें आधा निम्बू निचोड़ कर पियें, इस से मोटापा भी कम होगा.
- बढती आयु को रोके – इसमें vitamin भरपूर होने की वजह से ये बढती आयु को रोकता है अर्थात ये Anti Aging है, ये आँखों की रौशनी बढाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर रोगों से लड़ने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
- Multi Vitamin rich source – सहजन की जड़, फलियों, पत्तियों, फूल और तने की छाल अर्थात इसका पंचांग इन सब को एकत्रित कर के इनको सुखा लीजिये, फिर इसको कूट पीसकर चूर्ण बना लीजिये, यह चूर्ण किसी भी मल्टी विटामिन कैप्सूल से 100 गुणा बेहतर होगा.
- लीवर के लिए – अगर लीवर डैमेज हो गया हो तो ये इसको सुधारता है, ये लीवर की सूजन को कम करता है और ये Enzymes को Restore करता है. जिससे लीवर सही काम करने लगता है.
सहजन के सेवन की विधि.
इसको हर प्रकार से सेवन किया जा सकता है, जब मौसम में इसकी फली आती है तो इसकी सब्जी बना कर खाएं, और जब इसका मौसम नहीं होता तब आप इसके पत्तों को सुखाकर इसका एक एक चम्मच सुबह शाम खाएं. या ताज़ा पत्तों की चाय बना कर पियें. और आप इसकी छाल का काढ़ा बना कर पी सकते हैं. और अगर आप इसकी छाल का इस्तेमाल कर रहें हैं तो आप इस पेड़ को और भी लगायें, क्यूंकि अधिक छाल निकालने से पेड़ फलना फूलना बंद कर देता है. जब भी छाल निकाले तो पेड़ के पास में पड़ी हुयी मिटटी से उस जगह पर लेप कर दें.
- धमेंद्र कुमार उपाध्याय ( धमेंद्र भाई )
युवा सामाजिक कार्यकर्ता
मो. +91 - 8115073618

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