तुम अगर साथ देने का वादा करो
तुम_अगर_साथ_देने_का_वादा_करो मैं_यूँ_ही_मस्त_नग़मे_लुटाता_रहूं तुम अगर साज सरगम की छेड़ो यहाँ। मैं तुम्हारे लिए गीत गाता रहूँ।। तुम अगर फूल चुन चुनकर लाओ यहाँ। मैं ये गजरा तुम्हारा सजाता रहूँ।। तेरी जुल्फें फिज़ाओं की काली घटा। चाँद मुखड़े को तेरे छुपायें सदा।। तेरी आँखों में रहता नशा ए सुरूर। बिन पिये ही नशा जैसे हो मयकदा।। तुम अगर अपनी नजरों से देखो मुझे। मैं ये जाम ए नशा भूल जाता रहूँ ।। तुम अगर साज... ये गुलाबों के फूलों के जैसी हँसी। दे दिलों को सुकूँ ऐ मेरे हमनशीं।। तेरा चेहरा हँसी देख चँदा जले। क्योंकि चँदा से भी है तू महजबीं।। तुम अगर मेरे ख्वाबों की मलिका बनों। मैं सितारों की महफिल सजाता रहूँ।। तुम अगर साज.... तेरे आने से आती है खुशबू यहाँ। क्योंकि तू है गुलाबों की खुद पंखुड़ी।। तेरी आवाज सरगम सी प्यारी लगे। क्योंकि तुझमें है कोयल की जादूगरी।। तुम अगर अपनी पायल की सुर ताल दो। मैं फिज़ाओं में सरगम मिलाता रहूँ।। तुम अगर साज.... ये घटायें जो सावन की घिर आई हैं। तेरी जुल्फों की हैं ये सारी अदा।। ये पहाड़ों से...