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Showing posts from June, 2021

तुम अगर साथ देने का वादा करो

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तुम_अगर_साथ_देने_का_वादा_करो                    मैं_यूँ_ही_मस्त_नग़मे_लुटाता_रहूं तुम अगर साज सरगम की छेड़ो यहाँ। मैं तुम्हारे लिए गीत गाता रहूँ।। तुम अगर फूल चुन चुनकर लाओ यहाँ। मैं ये गजरा तुम्हारा सजाता रहूँ।। तेरी जुल्फें फिज़ाओं की काली घटा। चाँद मुखड़े को तेरे छुपायें सदा।। तेरी आँखों में रहता नशा ए सुरूर। बिन पिये ही नशा जैसे हो मयकदा।। तुम अगर अपनी नजरों से देखो मुझे। मैं ये जाम ए नशा भूल जाता रहूँ ।। तुम अगर साज... ये गुलाबों के फूलों के जैसी हँसी। दे दिलों को सुकूँ ऐ मेरे हमनशीं।। तेरा चेहरा हँसी देख चँदा जले। क्योंकि चँदा से भी है तू महजबीं।। तुम अगर मेरे ख्वाबों की मलिका बनों। मैं सितारों की महफिल सजाता रहूँ।। तुम अगर साज.... तेरे आने से आती है खुशबू यहाँ। क्योंकि तू है गुलाबों की खुद पंखुड़ी।। तेरी आवाज सरगम सी प्यारी लगे। क्योंकि तुझमें है कोयल की जादूगरी।। तुम अगर अपनी पायल की सुर ताल दो। मैं फिज़ाओं में सरगम मिलाता रहूँ।। तुम अगर साज.... ये घटायें जो सावन की घिर आई हैं। तेरी जुल्फों की हैं ये सारी अदा।। ये पहाड़ों से...

प्रेम और जिंदगी

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                                      प्रेम और जिंदगी जिस औरत ने भी इसे लिखा है ,उसने जिन्दगी का वास्तविक  अनुभव है और नयी पीढी के लिए उत्तम सन्देश है । मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना । मुझे अच्छा लगता है जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझ से कहता है, "रुको! मैं तुम्हे ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ ।" मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझ से एक कदम आगे चलता है - गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता है कि उसे मेरा ख्याल खुद से ज्यादा है। मुझे अच्छा लगता है जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़ मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार बार अपना हाथ बढ़ाता है । मुझे अच्छा लगता है जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना हिचक किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है ।और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह रखते वक़्त उसका यह ...