बोझ नही मैं "बेटी"
शाम हो गयी अभी बाहर घुमाओ न पापा थक गई चलते- चलते कंधे पर बिठाओ न पापा। लगाती है किलकारियाँ आंगन में तेरे उन किलकारियों को सजाओ न पापा। मम्मी तो सो गई छोड़कर आपहिं थपकी देकर सुलाओ न पापा। अभी तो थी खिलती कमल इस कमल को खिलाओ न पापा। स्कूल तो पूरी हो गयी अब कॉलेज भी पहुंचाओ न पापा। पाल पोस कर बड़ा किया अब जुदा मत कराओ न पापा। अब डोली में बैठा दिया तो आंसू मत बहाओ न पापा। आपकी मुस्कुराहट बहुत अच्छी है एकबार प्यार से मुस्कुराओ न पापा। मारते हैं क्यों सभी मेरे आने से पहले हमको इन पापियों से बचाओ न पापा। मैं तू हूँ लक्ष्मी घर की तेरे घर में लक्ष्मी को अपने लाओ न पापा। जलाते हैं दहेज के आग में इन दहेज दानवों को भगाओ न पापा। खिलाऊंगी फूल सदा आंगन की बगिया में तेरे अपनी आंगन की बगिया में सजाओ न पापा। करती हूं रचना, सम्पूर्ण सृष्टि का , इस सृष्टि का श्रृंगार कराओ न पापा। कभी बेटी, कभी बहन, कभी पत्नी इन सभी जन्मोंक रिश्तों में पाओ न पापा। करते हो बेटा बेटी का क्यों भेदभाव हमसे कम नही मैं उनसे करके बराबरी तुम दिखाओ न पापा। नही रहूंगी पीछा कभी उन बेटों से हमको भी बेटा ब...